मुख्‍य मील के पत्‍थर

 

1952

पिम्‍परी,पुणे पेनिसिलिन फैक्‍टरी की आधारशिला(वर्तमान में हिन्‍दुस्‍तान एंटिबायोटिक्‍स लि.) 1954 को हिन्‍दुस्‍तान एंटिबायोटिक्‍स लि.का पंजीकरण परियोजना पोटॅशियम पेनिसिलिन प्रथम क्रिस्‍टल के उत्‍पादन के लिए किया गया।

 

1956

भारत के प्रधान मंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा फैक्‍टरी का उदघाटन हुआ ।

 

1961

एच.ए.को 1961 में निष्‍पादन के लिए राष्‍ट्रपति पुरस्‍कार (कास्‍य शील्‍ड) से सम्‍मानित किया गया।

 

1962

पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा स्‍ट्रेप्‍टोमायसिन संयंत्र का उद्घाटन किया । यह संयंत्र कंपनी के अधिशेष श्रोत से वित्‍त पोष किया गया । वर्ष 1961-62 में सम्‍पूर्ण निष्‍पादन के लिए राष्‍ट्रपति पुरस्‍कार (रजत शील्‍ड) प्रदान की गयी ।

 

1963

एच.ए.का अपनी खोज हमायसिन बिक्री के लिए जारी ।

 

1965

स्‍ट्रेप्‍टोमायसिन उत्‍पाद की क्षमता दूगनी की गयी । एच.ए.एल द्वारा ऑरियोफंगिन को खोज की घोषणा की गयी । वर्ष 1962-63 में सम्‍पूर्ण निष्‍पादन प्राप्‍त करने पर राष्‍ट्रपति द्वारा पुरस्‍कार (रजत शील्‍ड) प्रदान किया गया । वर्ष 1968 में एच.ए.पाएलेट संयंत्र का आरम्‍भ ।

 

1970

एच.ए.एल वर्ष 1965-66 के दौरान उत्‍कृष्‍ठ निष्‍पादन के लिए राष्‍ट्रपति पुरस्‍कार (कास्‍य शील्‍ड) से सम्‍मानित किया गया ।

 

1973

प्रथम कामगार निदेशक मंडल में नियुक्‍त किया गया । यह सरकारी उपक्रम के इतिहास में प्रथम अवसर था कि प्रबंधन में कामगार को भागीदार बनाया गया ।

 

1974

6एपीए का उत्‍पादन आरम्‍भ ।

 

1975

भारत में प्रथम एम्‍पसिलिन का उत्‍पाद वाणिज्‍य आधार पर किया गया ।

 

1978

जेन्‍टामायसिन इंजे.का प्रथम बैच उदघाटन, मेसर्स मिडिपास हंगरी के बीच करार पर हस्‍ताक्षर ।

 

1980

एचए और कर्नाटक सरकार से कर्नाटक एंटिबायोटिक्‍स एवं फार्मास्‍यूटिकल्‍स लि.(केएपीएल)के स्‍थापन के लिए ।

 

1981

नागपुर के निकट महाराष्‍ट्र एंटिबायोटिक्‍स एवं फार्मास्‍यूटिकल्‍स (एमएपीएल)यूनिट की स्‍थापना ।

 

1982

फार्मूलेशन गतिविधियों का भारी विस्‍तार और नए आधुनिक फार्मूलेशन (पाउडर इंजे)संयंत्र का आरम्‍भ ।

 

1985

एचएएल को महाराष्‍ट्र सरकार और बेसिक ड्रग्र एक्‍सपोर्ट प्रमोशन कॅप्‍सूल से एक्‍सपोर्ट मैरिट प्रमाणपत्र प्राप्‍त हुआ ।

 

1986

एचएएल के लिए पुनरूत्‍थान योजना बनाकर उसका कार्यान्‍वयन् ।

 

1987

उत्‍पादन मूल में 40% प्रतिशत वृद्धि ।

 

1988

एचएलि ने पुनरूत्‍थान योजना का लक्ष्‍य से अधिक उत्‍पाद । पेनिसिलिन की क्षमता का 360एमएमयू उन्‍नयन किया गया । उच्‍च क्षमता कैस्‍पूलेशन मशीन की प्रतिस्‍थापना की गयी ।

 

1991

आइवीफ्यूड सुविधा आरम्‍भ । पेनिसिलिन की क्षमता 800 एमएमयू बढाई गयी ।

 

1992

कार्बोनडीजम संयंत्र और आरियोफंगिन संयंत्र का आरम्‍भ पेनिसिलिन की क्षमता 900एमएमयू की गयी ।

 

1993

नयी तरल जेन्‍टामायसिन इंजे.लाइन का प्रतिस्‍थापना । दूसरी उच्‍च क्षमता कैस्‍पूलेशन मशीन की प्रतिस्‍थापना । औद्योगिक स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा और रोटरी क्‍लब पुणे द्वारा वर्ष 1990-91,1991-92 एवं 92-93 निरंतर सुरक्षा प्रचालन से प्रथम पुरस्‍कार । निर्यात प्रचालन के लिए MEMEXCIL  वर्ष 1991-92 का उत्‍कृष्‍ठ निर्यात निष्‍पादन पुरस्‍कार ।

 

1995

एचएएल और मैक्‍स जीबी लि.के बीच दि.06.09.1995संयुक्‍त उपक्रम करार । हिन्‍दुस्‍तान मैक्‍सजीबी का रसायन और उर्वरक मंत्रालय के मंत्री श्री.रामलखन यादव द्वारा 08.10.1995 का उदघाटन ।

 

2002

संयुक्‍त उपक्रम आरपीजी लाइफ साइन्‍स लि. ।

 

2009

माननीय श्री.रामविलास पासवान रसायन और उर्वरक मंत्रालय द्वारा सिफालोस्‍पोरिन का उदघाटन।