अनुसंधान और विकास

 

हिंदुस्‍तान एंटिबायोटिक्‍स लिमिटेड में अनुसंधान और विकास विभाग की स्‍थापना 1955 में की गई। भारत वर्ष में स्‍थापना के पश्‍चात आज तक,अनुसंधान एवं विकास विभाग ने अपना योगदान देते हुए,एंटिबायोटिक्‍स तथा अन्‍य जैविक रसायन क्षेत्र के निर्माण में महत्‍वपूर्ण कार्य किया है।

हमारे अनुसंधान एवं विकास विभाग का शक्ति उच्‍चशिक्षित और अनुभवी मानव शक्ति है जो सुस्‍थापित प्रयोगशाला और तकनीकी उपकरणों की सुविधाओं की मदद से  औषधि विषयक बहुआयामी अनुसंधान कार्यक्रमों में अपना योगदान देते है। अनुसंधान के साथसाथ यह विभाग अन्‍य विभागों को जैसे की गुणवत्‍ता नियंत्रण विभाग, गुणवत्‍ता आश्‍वासन विभाग, उत्‍पादन विभाग तथा विपणन विभाग को तकनीकी सहायता प्रदान करता है। देश की विभिन्‍न वैज्ञानिक संस्‍थाए जैसे की वैज्ञानिक तथा तकनीकी विभाग, पुणे विश्‍वविद्यालय, पर्यावरण तथा प्रदूषन नियंत्रण कक्ष ने हमारे अनुसंधान विभाग के कार्य के योगदान को देखते हुए मूल और व्‍यवहारिक अनुसंधान की अनुमति दी है।

औषध निर्माण क्षेत्र में हमारें अनुसंधान एवं विकास विभाग के अनुभव को साथ में लिये हुए तथा आजकल के उच्‍च तकनीकी उपकरणों की सहायता से नई पीढी की दवाई के निर्माण में तथा औषधि उद्योग में अग्रणी स्‍थान बनाए रखते हुए ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों तक उचित मूल पर ओषधि पहुंचाने के लिये हम प्रतिबध्‍द/वचनबध्‍द है

अनुसंधान एवं विकास विभाग में निम्‍नलिखित अनेक अनुभाग कार्यरत है। इन अनुभागों में निम्‍नलिखित गतिविधियां होती है।

 

      औद्योगिक सूक्ष्‍मजीवशास्‍त्र (Industrial Microbiology)

 

   ज्‍यादा उपज देनेवाली स्‍ट्रेन का रखरखाव ताकि उसका उपयोग बडे पैमाने के 

   फर्मेंन्‍टेशन में हो सके ।

   म्‍युटेशन द्वारा स्‍ट्रैन में सुधार(भौतिक तथा रासायनिक तत्‍वों का इस्‍तेमाल करके)

   प्राकृतिक चुनाव तथा सेल इन्‍फयूजन तकनीक का प्रयोग करते हु(Protoplastफयूजन)

   मूल फर्मेंन्‍टेशन पैरामिटर में बदलाव कर ज्‍यादा उपज वाले स्‍ट्रेन का विकास करना ।

   नई जैविक रसायनों तथा एंटिबायोटिक्‍स के लिये परख विधि का विकास तथा सुधार

 

    जीवरसायनशास्‍त्र (Biochemistry)

 

   एनझाईम का शोधन तथा शुध्‍दीकरन करना।

   एनझाईम का अचलीकरण करना।

   अचलिकरण किए हुए एनझाईम का इस्‍तेमाल कर जीवसंपरिवर्तण प्रक्रिया की मदद से औद्यागिक दृष्टिसे महत्‍वपूर्ण मध्‍यवर्ती रसायनों का निर्माण तथा विकास करना।

 

   भेषजगुणविज्ञान (Pharmacology)

 

   जैविक रसायनों कृत्रिम रासायनिक उत्‍पादों तथा वनस्‍पतीजन्‍य उत्‍पादों का विस्‍तार से भेषजगुणात्‍मक मूल्‍यांकन प्रायोगिक प्राणियों के करना।

   रासायनिक भेषजगुणात्‍मक तथा संरचनात्‍मक संबंधों का अभ्‍यास करना।

   विविध प्रायोगिक प्राणियों की जाति में पूर्व नैदानिक मूल्‍यांकन करना ।

   औषधों के जैविक उपलब्‍ध जैविक परख विधि तथा आंतरिक उपलब्‍धता इन स्‍तरों पर अध्‍ययन करना।

 

परजिवशास्‍त्र और इम्‍युनोडासग्‍नोस्टिक (Parasitology & Immunodiagnostics)

 

   अन्‍य प्रयोगशाला की सहयोग से इम्‍युनोडायग्‍नोस्टिक किट का विकास करना।

   विविध परजीवी स्‍ट्रैन का रखरखाव तथा जैविक रसायनों का प्रति परजीवी 

   क्रियाकलाप का अध्‍ययन करना।

 

उत्‍पाद विकास कक्ष (Product development)

 

   मानव, जानवर तथा कृषि के उपयोगी दवाइयों के नवीनतम मात्राओं का   

   विकास कर उसका विश्‍लेषन करना तथा स्थिरता का अध्‍ययन करना।

 

भेषजी प्रौद्योगिक के विषय में अनुसंधान करना

 

   मौजूदा दवाईयों की मात्राओं को बनाने के लिये आनेवाली लागत में कमी लाने  

   की उद्येश से सुधार करना।

   उत्‍पाद की शिकायतो की पडताल/अन्‍वेषन करना।

   पैकिंग तथा प्रस्‍तुतिकरण का नवप्रवर्तनकारी अध्‍ययन करना।

 

ऑरगॅनिक तथा विश्‍लेशनणात्‍मक रसायनशास्‍त्र (Organic & Analytical Chemistry)

 

   थोक इवाईयां या उनके मध्‍यवर्ती रसायनों के निर्माण की प्रक्रिया विकसित करना ।

   मौजूदा औषध निर्माण प्रक्रिया में लागत में कमी लरने की उद्येश्‍य से सुधार करना ।

   तकनीक का आवशोषण,अनुकुलन तथा सुधार के लिये प्रयास करना। 

   फंगल मेटावोलाइट से नये रसायनिक तलब से आइसोलेट और कैरेक्‍टा

   जैविक रसायनो का विश्‍लेषण करना ।

 

प्रायोगिक संयंत्र (Pilot Plant)

 

   फर्मेंटेशन,रासायनिक तथा जीवरसायनिक प्रक्रिया का विकास कर उसका   

   प्रायोगिक संयंत्र में विस्‍तार करना।

   अनुसंधान एवं विकास विभाग और अन्‍य स्‍त्रोत से प्राप्‍त तकनीक का 

   हस्‍तांतरण करना।

   औषधि रसायनों का तथा मध्‍यवर्ती रसायनों का आंतरिक उपयोग तथा छोटे 

   पैमाने पर नैदानिक/क्षेत्रीय जांच परख के लिये निर्माण करना।